बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे साइबर अपराध: जानें ऑनलाइन ठगी से कैसे बचाएँ बच्चों को
ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया, फर्जी प्रोफाइल और अनजान लिंक के जरिए अपराधी बच्चों को निशाना बना सकते हैं। बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए माता-पिता और शिक्षकों को सतर्क रहने के साथ-साथ बच्चों से खुलकर बातचीत भी करनी चाहिए।

बच्चों को ऑनलाइन किस तरह निशाना बनाया जाता है?
Vishvas News की 28 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अपराधी ऑनलाइन गेमिंग और फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल जैसे तरीकों से बच्चों तक पहुंच बना सकते हैं। वे दोस्ती का भरोसा जीतकर निजी जानकारी हासिल करने, ब्लैकमेल करने या अनुचित बातचीत में फंसाने की कोशिश कर सकते हैं।

- फर्जी प्रोफाइल: कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर बच्चे से दोस्ती कर सकता है।
- गेमिंग का लालच: मुफ्त रिवॉर्ड, गेम करेंसी या इनाम के बहाने निजी जानकारी मांगी जा सकती है।
- फिशिंग लिंक: संदिग्ध लिंक पर क्लिक कराने से डिवाइस या अकाउंट की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
- साइबर बुलिंग और धमकी: बच्चे को डराने, अपमानित करने या ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा सकती है।
- निजी तस्वीरें मांगना: किसी भी अनजान व्यक्ति को निजी तस्वीरें, वीडियो, पासवर्ड या OTP साझा नहीं करना चाहिए।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े क्या बताते हैं?
रिपोर्ट में लोकसभा में गृह मंत्रालय के लिखित उत्तर के हवाले से बच्चों के खिलाफ दर्ज साइबर अपराध के मामलों के आंकड़े दिए गए हैं:
| वर्ष | दर्ज मामले |
|---|---|
| 2018 | 232 |
| 2019 | 306 |
| 2020 | 1,102 |
| 2021 | 1,376 |
| 2022 | 1,823 |
ये आंकड़े रिपोर्ट में उद्धृत 2018–2022 की अवधि के हैं; इन्हें वर्तमान वर्ष के आंकड़े न समझें। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें साइबर ब्लैकमेलिंग/धमकी/उत्पीड़न, फर्जी प्रोफाइल, साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन गेम आदि के माध्यम से होने वाले अपराध शामिल थे।

बच्चों को साइबर अपराध से कैसे सुरक्षित रखें?
- बच्चों को समझाएँ कि वे अपना पता, स्कूल, फोन नंबर, पासवर्ड, OTP या वित्तीय जानकारी ऑनलाइन साझा न करें।
- सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग मजबूत रखें और प्रोफाइल को सार्वजनिक रखने से बचें।
- बच्चे किन ऐप्स, गेम्स और वेबसाइटों का उपयोग करते हैं, इस पर उम्र के अनुसार ध्यान रखें।
- अनजान लोगों से निजी चैट, वीडियो कॉल या आमने-सामने मिलने के प्रस्ताव पर सावधानी बरतना सिखाएँ।
- डिवाइस और ऐप्स को अपडेट रखें; मजबूत, अलग-अलग पासवर्ड और उपलब्ध होने पर दो-स्तरीय सुरक्षा का उपयोग करें।
- बच्चे को भरोसा दिलाएँ कि कोई गलती हो जाए या वह किसी जाल में फंस जाए, तो बिना डर के माता-पिता या शिक्षक को बताए।
- धमकी या अनुचित संदेश मिलने पर चैट, यूज़रनेम, लिंक और स्क्रीनशॉट जैसे सबूत सुरक्षित रखें; सामग्री को आगे साझा न करें।
साइबर अपराध की शिकायत कहाँ करें?
भारत में साइबर अपराध की शिकायत के लिए आधिकारिक पोर्टल National Cyber Crime Reporting Portal का उपयोग किया जा सकता है। तत्काल वित्तीय साइबर धोखाधड़ी में हेल्पलाइन 1930 पर जल्द संपर्क करें। बच्चे की सुरक्षा को तत्काल खतरा हो, तो स्थानीय पुलिस या आपातकालीन सहायता लें।
स्रोत: Vishvas News, “Cyber Safe: हर साल बढ़ रहा बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध का आंकड़ा, जाने कैसे बच्चे बनते हैं इसका शिकार?”, प्रकाशित 28 अप्रैल 2026। मूल रिपोर्ट पढ़ें. यह लेख जागरूकता के लिए संक्षेप और पुनर्लेखन है।
